औरंगाबाद। औरंगाबाद शहर में एक अनोखी पहल शुरु की गई है। इसका नाम है 'रोटी बैंक'। इसके तहत कोई भी व्यक्ति गरीब, बूढ़ा, बीमार, बेसहारा और बेरोजगार लोगों के लिए रोटियां जमा कर सकता है। इस अनूठी पहल की वजह से रोजाना करीब 500 लोगों को खाना मिल रहा है।
देर रात तक सर्विस
बैंक में सदस्यता के लिए सिर्फ एक फाॅर्म भरना होता है। बैंक उपभोक्ता को एक विशेष कोड संख्या देता है। बैंक उनसे आग्रह करता है कि वह कम से कम दो ताजी रोटी, एक प्लेट शाकाहारी या मांसाहारी सब्जी के साथ किसी भी समय जमा कर दें। जिससे जरूरतमंद को खाना उपलब्ध कराया जा सके। बैंक सुबह 11 बजे से लेकर रात 11 बजे तक खुला रहता है।
यूसुफ मुकाती ने की शुरुआत
- इसकी शुरुआत इस्लामिक सेंटर (एचएमआईसी) के संस्थापक यूसुफ मुकाती ने की है।
- इसकी शुरुआत इस्लामिक सेंटर (एचएमआईसी) के संस्थापक यूसुफ मुकाती ने की है।
- यह भारत का दूसरा रोटी बैंक है। इससे पहले इसी तर्ज पर कुछ लोगों ने बुंदेलखंड में भी रोटी बैंक शुरू किया था।
- मुकाती कहते हैं 'मैं कई सालों से शहर में ऐसे बहुत से गरीबों को देख रहा हूं।
- खासकर मुस्लिम जो दिन में एक बार भोजन का खर्च नहीं उठा पाते हैं, क्योंकि वह सम्मानजनक जिंदगी जीना चाहते हैं, इसलिए भीख भी नहीं मांग सकते।
स्टोरेज की फैसिलिटी
इस बैंक को गरीबों और वंचित परिवारों के लिए शुरू किया गया है। इसे शुरू करने से पहले मैंने परिवार के लोगों से काफी बातचीत की। पांच दिसंबर को इसका शुभारंभ हुआ। पहले ही दिन करीब 50 रोटियां बैंक में जमा की गईं।' बैंक में एक फ्रीज लगाया गया है। जिसमें 700 पैकेट्स एक साथ रखे जा सकते हैं। कोई भी व्यक्ति दिन में एक या अधिक बार रोटियां जमा कर सकता है।
सेंटर में पढ़ने वाली करीब 100 लड़कियां भी बैंक को अपना योगदान दे रही हैं। शुरू में 250 सदस्य थे। अब इसमें करीब 25 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है। जरूरतमंद यहां आकर किसी भी समय भोजन प्राप्त कर सकते हैं। फिलहाल इस बैंक से 500 लोग रोजाना खाना खा रहे हैं। हाल ही में कुछ लोगों ने 50 प्लेट खाना जमा किया।



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